📺 Watch on Jio TV
🌐 Language / भाषा
  • हिन्दी (Hindi)
  • বাংলা (Bengali)
  • ਪੰਜਾਬੀ (Punjabi)
  • ગુજરાતી (Gujarati)
  • मराठी (Marathi)
  • தமிழ் (Tamil)
  • తెలుగు (Telugu)
  • ಕನ್ನಡ (Kannada)
  • മലയാളം (Malayalam)
  • ଓଡ଼ିଆ (Odia)
  • اردو (Urdu)
  • অસમীয়া (Assamese)

Malegaon Blast Case Verdict: साध्वी प्रज्ञा-पुरोहित बरी, NIA सबूतों में फेल

17 साल बाद आया बड़ा फैसला

17 साल पुराने Malegaon Blast Case में गुरुवार को मुंबई की विशेष NIA अदालत ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सातों आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि केवल नैतिक आधार पर नहीं हो सकती। फैसले के बाद कर्नल पुरोहित ने कोर्ट का आभार जताया, जबकि साध्वी प्रज्ञा की आंखें नम हो गईं।

2008 की रात दहला मालेगांव

29 सितंबर 2008 की रात 9:35 बजे मालेगांव के भीखू चौक पर जोरदार विस्फोट हुआ था। रमजान का महीना चल रहा था और अगले दिन नवरात्र शुरू होने वाला था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हुए थे। शुरुआत में जांच एटीएस ने संभाली, लेकिन 2011 में केस NIA को सौंप दिया गया।

अभियोजन पक्ष ठोस सबूत न दे सका

विशेष जज ए.के. लाहोटी ने कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप था कि विस्फोट में उनकी मोटरसाइकिल का उपयोग हुआ, लेकिन कोर्ट ने माना कि घटना से दो साल पहले ही वे सन्यास ले चुकी थीं और फोरेंसिक टीम चेसिस व इंजन नंबर तक साबित नहीं कर पाई।

फोरेंसिक रिपोर्ट ने बदली तस्वीर

कोर्ट ने नोट किया कि धमाके के बाद भीखू चौक पर कोई गड्ढा नहीं मिला, जबकि मोटरसाइकिल पर विस्फोटक होने पर गड्ढा बनना चाहिए था। यही बात अभियोजन की दलील को कमजोर कर गई।

कर्नल पुरोहित के आरोप भी गिरे

कर्नल पुरोहित पर कश्मीर से RDX लाने और बम बनाने के आरोप थे। लेकिन कोर्ट ने कहा कि उनके घर या किसी बैठक में इसका कोई सबूत नहीं मिला। अभियोजन पक्ष अभिनव भारत संगठन और धन जुटाने की थ्योरी भी साबित नहीं कर सका।

CDR और मेडिकल रिपोर्ट पर भी सवाल

कोर्ट ने माना कि अभियोजन कॉल डाटा रिकॉर्ड का 65B सर्टिफिकेट तक पेश नहीं कर सका। मेडिकल सर्टिफिकेट्स में हेरफेर के कारण कोर्ट ने केवल 95 घायलों को मान्यता दी।

मुआवजा देने का आदेश

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए। इस फैसले के साथ ही 17 साल बाद Malegaon Blast Case पर कानूनी अध्याय फिलहाल बंद हो गया।

⚡ SHARE THIS POST

Malegaon Blast Case Verdict: साध्वी प्रज्ञा-पुरोहित बरी, NIA सबूतों में फेल

17 साल बाद आया बड़ा फैसला

17 साल पुराने Malegaon Blast Case में गुरुवार को मुंबई की विशेष NIA अदालत ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सातों आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि केवल नैतिक आधार पर नहीं हो सकती। फैसले के बाद कर्नल पुरोहित ने कोर्ट का आभार जताया, जबकि साध्वी प्रज्ञा की आंखें नम हो गईं।

2008 की रात दहला मालेगांव

29 सितंबर 2008 की रात 9:35 बजे मालेगांव के भीखू चौक पर जोरदार विस्फोट हुआ था। रमजान का महीना चल रहा था और अगले दिन नवरात्र शुरू होने वाला था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हुए थे। शुरुआत में जांच एटीएस ने संभाली, लेकिन 2011 में केस NIA को सौंप दिया गया।

अभियोजन पक्ष ठोस सबूत न दे सका

विशेष जज ए.के. लाहोटी ने कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप था कि विस्फोट में उनकी मोटरसाइकिल का उपयोग हुआ, लेकिन कोर्ट ने माना कि घटना से दो साल पहले ही वे सन्यास ले चुकी थीं और फोरेंसिक टीम चेसिस व इंजन नंबर तक साबित नहीं कर पाई।

फोरेंसिक रिपोर्ट ने बदली तस्वीर

कोर्ट ने नोट किया कि धमाके के बाद भीखू चौक पर कोई गड्ढा नहीं मिला, जबकि मोटरसाइकिल पर विस्फोटक होने पर गड्ढा बनना चाहिए था। यही बात अभियोजन की दलील को कमजोर कर गई।

कर्नल पुरोहित के आरोप भी गिरे

कर्नल पुरोहित पर कश्मीर से RDX लाने और बम बनाने के आरोप थे। लेकिन कोर्ट ने कहा कि उनके घर या किसी बैठक में इसका कोई सबूत नहीं मिला। अभियोजन पक्ष अभिनव भारत संगठन और धन जुटाने की थ्योरी भी साबित नहीं कर सका।

CDR और मेडिकल रिपोर्ट पर भी सवाल

कोर्ट ने माना कि अभियोजन कॉल डाटा रिकॉर्ड का 65B सर्टिफिकेट तक पेश नहीं कर सका। मेडिकल सर्टिफिकेट्स में हेरफेर के कारण कोर्ट ने केवल 95 घायलों को मान्यता दी।

मुआवजा देने का आदेश

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए। इस फैसले के साथ ही 17 साल बाद Malegaon Blast Case पर कानूनी अध्याय फिलहाल बंद हो गया।

⚡ SHARE THIS POST

Related Posts

Anne Carson को साहित्य का Nobel Prize, दुनिया भर में मची हलचल

बड़ा सम्मान: Anne Carson को 2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान होते ही साहित्य जगत में हलचल मच गई। स्वीडिश अकादमी ने उनके साहसिक और कल्पनाशील…

BRICS Women Summit: नेताओं के आगमन से पहले दिल्ली में जुटीं ब्रिक्स देशों की महिला नेता

राजधानी में बड़ी आर्थिक कूटनीति BRICS Women Summit का आयोजन नई दिल्ली में मुख्य राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन से ठीक पहले एक नई दिशा तय कर रहा है। महिला व्यापार गठबंधन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *