महिला आरक्षण बिल: क्या विशेष सत्र में सरकार पलट पाएगी बाजी?
महिला आरक्षण बिल पर सरकार की अगली रणनीति क्या होगी, और क्या संसद में इस बार जरूरी समर्थन जुट पाएगा? 16 अक्टूबर 2026 की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि, सत्र की तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
विशेष सत्र बुलाने की तैयारी: NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस बार जरूरी संसदीय समर्थन जुटाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। चर्चा में डीएमके और कुछ छोटे दलों का समर्थन हासिल करने की कोशिश भी शामिल है।
अप्रैल में क्यों अटक गया था बिल: अप्रैल 2026 में लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक विशेष बहुमत नहीं मिल पाया था। मतदान में 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया था। इसके बाद संबंधित परिसीमन विधेयक पर आगे की कार्रवाई भी नहीं हो सकी।
क्या है बहुमत का गणित: संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। इसलिए सरकार के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होगा।
डीएमके की भूमिका पर नजर: रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार डीएमके सहित अन्य दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर आपत्तियां भी सामने आई हैं। ऐसे में विधेयक को लेकर राजनीतिक सहमति बनाना अहम चुनौती है।
महिला आरक्षण और परिसीमन का संबंध: महिला आरक्षण कानून, 2023 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। इसके क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार इससे जुड़े प्रावधानों में बदलाव की कोशिश कर चुकी है।
अब आगे क्या होगा: फिलहाल विशेष सत्र की संभावना मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित है। अब सबकी नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा, विपक्षी दलों के रुख और जरूरी बहुमत जुटाने की रणनीति पर रहेगी।






