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प्रतिनिधि सभा पर टिकी नजरें: सितंबर में पेश होगा बिल, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद बनेगा कानून।

US Senate Tariff Bill के पास होते ही वैश्विक व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है क्योंकि इस फैसले से भारत और रूस के आर्थिक संबंधों पर सीधी चोट पड़ सकती है। वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेट ने लंबे समय से लंबित इस विधेयक को भारी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी है। इस नए घटनाक्रम के बाद वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ आ गया है।

सीनेट में भारी मतदान से प्रस्ताव मंजूर अमेरिका की सीनेट में इस प्रतिबंध प्रस्ताव के समर्थन में 86 वोट पड़े जबकि विरोध में केवल 11 सदस्यों ने मतदान किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य साढ़े चार वर्ष से जारी यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।

अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया

राष्ट्रपति को मिला असीमित अधिकार US Senate Tariff Bill लागू होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का सीधा अधिकार मिल जाएगा।

भारत और चीन पर सबसे बड़ा संकट इस विधेयक का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव भारत, चीन, जापान और कुछ यूरोपीय देशों पर पड़ सकता है जो बड़े पैमाने पर रूसी ऊर्जा संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। भारत यूक्रेन युद्ध के बाद से प्रतिदिन 20 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का आयात रूस से कर रहा है।

प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार यह विधेयक रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज दिवंगत सांसद लिंडसे ग्राहम के प्रयासों का परिणाम है और इसे सितंबर में प्रतिनिधि सभा में पेश किया जाएगा। वहां से पारित होने के बाद US Senate Tariff Bill पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह कानून का रूप ले लेगा।

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