गलवान घाटी के खौफनाक मोड़ के बाद क्या बीजिंग की कोई बड़ी रणनीति पर्दे के पीछे पक रही है? India China Border Dispute पर बीजिंग के अचानक बदले तेवरों ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका कर रख दिया है। अमेरिकी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के बीच ब्रिक्स के जरिए अपना दबदबा मजबूत करने की होड़ में लगा चीन अब भारत के साथ सालों पुरानी कड़वाहट खत्म करने के लिए अप्रत्याशित रूप से गंभीर कदम उठा रहा है।
शी चिनफिंग के साथ भारत पहुंचे पावरफुल चीनी दिग्गजों का असली मकसद क्या है? राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे को हर हाल में ऐतिहासिक बनाने के लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे शक्तिशाली अधिकारी नई दिल्ली पहुंचे हैं। इस हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल में चिनफिंग के सबसे करीबी माने जाने वाले काई क्यूई और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं, जो इशारा करता है कि India China Border Dispute को सुलझाना अब चीन की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है।
क्या दोनों देश मिलकर नया वैश्विक इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं? चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने माना है कि यदि दुनिया के दो सबसे बड़े देश एक सुर में बोलेंगे तो वैश्विक अनिश्चितता के दौर में पूरी दुनिया को उनकी बात सुननी पड़ेगी। सीमा विवाद सुलझाने के लिए डोभाल-वांग यी वार्ता और अरुणाचल प्रदेश में सैन्य कोर कमांडरों की दो दिवसीय बैठक में गैर-विवादित क्षेत्रों के निर्धारण पर बनी सहमति इसका ठोस प्रमाण है।
क्या पुराने जनरलों पर गिरी गाज से बीजिंग ने नई दिल्ली को कोई गुप्त संदेश भेजा है? गलवान और डोकलाम संघर्ष से जुड़े रहे चीनी वेस्टर्न थिएटर कमांड के पूर्व प्रमुख जनरल झाओ जोंगछी को बिना कोई कारण बताए अचानक सभी अहम सरकारी पदों से हटा दिया गया है। India China Border Dispute के इतिहास में सैन्य अधिकारियों पर इस तरह की कार्रवाई को दोनों देशों के बीच बने तनाव को कम करने और कूटनीतिक विश्वास बहाल करने की चीनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।







