India’s First Hydrogen Train के पटरियों पर उतरते ही भारतीय रेलवे ने वैश्विक परिवहन के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। पर्यावरण को बिना किसी नुकसान के और बिना एक बूंद डीजल का इस्तेमाल किए, इस स्वदेशी ट्रेन ने देश की हरित क्रांति को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार दे दी है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर जैसे ही इसे हरी झंडी दिखाई गई, वैसे ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की एलीट लीग में शामिल हो गया जो इस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुआ सफर रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद देश की इस पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का नियमित परिचालन शुरू कर दिया गया है। यह स्पेशल ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद रेलवे स्टेशन से प्रस्थान करती है और 89 किलोमीटर लंबे ट्रैक को तय करते हुए सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचती है। 12 प्रमुख स्टेशनों को कवर करने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने यात्रियों की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला है और इसका किराया सामान्य पैसेंजर ट्रेन के बराबर रखा है।
प्रदूषण को पूरी तरह कर देगी समाप्त इस ट्रेन की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खासियत यह है कि यह वातावरण में बिल्कुल भी धुआं या हानिकारक गैसें नहीं छोड़ती है। India’s First Hydrogen Train में लगाई गई अत्याधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक हवा से ऑक्सीजन और सिलेंडर से हाइड्रोजन लेकर रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली पैदा करती है। इस पूरी प्रक्रिया में इंजन के साइलेंसर से उत्सर्जन (Emission) के रूप में केवल शुद्ध जल-वाष्प (Water Vapor) और थोड़ी सी गर्मी बाहर निकलती है, जो प्रकृति के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
ब्रॉडगेज पर दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा विशेष रूप से डिजाइन की गई यह स्वदेशी ट्रेन तकनीकी रूप से भी बेहद उन्नत है। 10 कोच वाले इस ट्रेनसेट में दोनों सिरों पर 1,200 किलोवाट की क्षमता वाले दो ड्राइविंग पावर कार (DPCs) लगे हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट की शक्ति पैदा करते हैं। यह सेटअप इसे दुनिया की सबसे लंबी और ब्रॉडगेज प्लेटफॉर्म पर सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन बनाता है, जो 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है।
ईंधन भरने के लिए जींद में बना विशेष हब इस ट्रेन के सुचारू संचालन और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा के जींद में एक विशेष हाइड्रोजन भंडारण और रीफ्यूलिंग स्टेशन का निर्माण किया गया है। चूंकि हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन और फिलिंग स्टेशन दोनों जगहों पर एडवांस मल्टी-टियर लीक डिटेक्टर, फ्लेम सेंसर्स और ऑटोमैटिक अलार्म सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही ऑन-बोर्ड क्रू और मेंटेनेंस स्टाफ को विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ा प्रशिक्षण भी दिया गया है।
विरासत और पहाड़ी रूटों पर चलेंगी 35 ट्रेनें रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की अपनी राष्ट्रीय रणनीति के तहत एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। जींद-सोनीपत रूट पर मिली इस ऐतिहासिक सफलता के बाद, ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के अंतर्गत देश के अन्य संवेदनशील और पर्यटन-प्रधान पहाड़ी रेल रूटों (जैसे कालका-शिमला) पर ऐसी 35 और ट्रेनें चलाने की योजना है। India’s First Hydrogen Train का यह सफल कदम साल 2030 तक भारतीय रेलवे को शत-प्रतिशत ‘नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जक’ बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा।







