सत्या निकेतन की 56 साल पुरानी यात्रा की दर्दनाक दास्तानSatya Niketan Building Collapse की भयावह घटना ने न केवल पूरी राजधानी को दहला दिया है, बल्कि इस पूरे इलाके के इतिहास और अनियंत्रित निर्माण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के ठीक सामने बसा यह इलाका देखते ही देखते मलबे का ढेर बन गया।
झुग्गी पुनर्वास कॉलोनी से हुई थी शुरुआतSatya Niketan Building Collapse के इस ऐतिहासिक पहलू को समझना जरूरी है कि वर्ष 1970 के दशक में इसे एक सामान्य पुनर्वास बस्ती के रूप में बसाया गया था। छोटे-छोटे भूखंडों पर बने इन मकानों को शुरुआती दौर में केवल एक या दो मंजिलों तक ही सीमित रखने का प्रावधान किया गया था।
साउथ कैंपस के उभार ने बदला नक्शाSatya Niketan Building Collapse की मुख्य वजहों में से एक इस क्षेत्र का तेजी से हुआ व्यवसायीकरण भी माना जा रहा है। जैसे-जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस विकसित हुआ, वैसे-वैसे देश भर से आने वाले छात्रों के लिए यह क्षेत्र मुख्य रिहाइशी केंद्र में बदल गया।
अवैध निर्माण और पीजी का बढ़ता मकड़जालSatya Niketan Building Collapse की जांच में यह बात सामने आ रही है कि मानकों को ताक पर रखकर ढाई मंजिल की अनुमति वाले प्लाटों पर पांच-पांच मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गईं। पुरानी नींव पर अतिरिक्त मंजिलों का बोझ और बेसमेंट में बिना सुरक्षा ऑडिट के कराई जा रही मरम्मत इस बड़े हादसे का कारण बनी।







