City Heat Action Plan की इस नई और चौंकाने वाली अपडेट ने उत्तर Pradesh के प्रशासनिक गलियारों में अचानक से भारी हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए एनजीओ और निजी संस्थाओं द्वारा तैयार की गई पुरानी रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकार के इस औचक कदम के बाद अब राज्य के 11 प्रमुख शहरों में गर्मी से निपटने की पूरी रणनीति को नए सिरे से बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
अधिकारियों को कड़ा अल्टीमेटम: City Heat Action Plan के तहत अब लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, मुरादाबाद, अयोध्या और गाजियाबाद के जिलाधिकारियों (DMs) को खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर नई विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का सख्त जिम्मा सौंपा गया है। पहले चरण में इस काम के लिए गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को जिम्मेदारी दी गई थी और प्रति जिला 11 लाख रुपये तक का बजट आवंटित था, लेकिन उनकी रिपोर्ट्स मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
विभागों का महा-समन्वय: City Heat Action Plan को अचूक बनाने के लिए अब जिला प्रशासन, नगर निगम, आपदा प्रबंधन, कृषि, बागवानी और मौसम विभाग एक साथ मिलकर काम करेंगे। इस बार किसी भी बाहरी एजेंसी के भरोसे रहने के बजाय जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है, जिसमें स्थानीय विश्वविद्यालयों के पर्यावरण विशेषज्ञों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है ताकि शहरों में छोटे वन क्षेत्रों (Urban Forests) को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाया जा सके।






