Prayagraj Rambagh Waterlogging के गंभीर हालात का जायजा लेने पहुंचे पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के महाप्रबंधक प्रभाष दनसाना ने जिम्मेदार अफसरों की जमकर क्लास लगाई।
पांच दिनों से जलमग्न रेल पटरियां प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक से तीन तक की पटरियां पिछले पांच दिनों से पानी में पूरी तरह डूबी हुई हैं। पटरियों पर पानी भरने से सिग्नल और पैनल सिस्टम ठप पड़ गए हैं, जिससे चारों तरफ बदहाली और दुर्गंध का माहौल बन गया है।
महाप्रबंधक ने अफसरों से पूछे तीखे सवाल निरीक्षण के दौरान जीएम प्रभाष दनसाना ने पटरियों की तरफ इशारा करते हुए अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि महाकुंभ के दौरान करोड़ों रुपये खर्च होने और हर साल ड्रेनेज सफाई के नाम पर लाखों का बजट पास होने के बावजूद Prayagraj Rambagh Waterlogging जैसी नौबत क्यों आई? जीएम के तीखे सवालों के आगे इंजीनियरिंग विंग के अफसर जवाब नहीं दे सके।
कॉलोनी और दफ्तरों में भरा पानी स्टेशन परिसर के साथ-साथ रेलवे आवासों में भी चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है, जिससे रेल कर्मचारियों और उनके परिजनों का जीना दूभर हो गया है। जीएम ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि समय रहते हाई-पावर डीवाटरिंग पंप लगाकर पानी क्यों नहीं निकाला गया और प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्य तुरंत क्यों शुरू नहीं किए गए।
ट्रेनों के संचालन पर पड़ा असर इस स्थिति के बाद जीएम ने तुरंत अतिरिक्त डीवाटरिंग पंप मंगवाने और मुख्य नालों के ब्लॉकेज खुलवाने के सख्त निर्देश जारी किए। Prayagraj Rambagh Waterlogging के कारण रामबाग से मऊ, बलिया और बनारस जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों का संचालन झूंसी स्टेशन से कराने का फैसला लिया गया है।







