
Ghaziabad Ashrafi Early Release Rejected फैसले से उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। अपनी ही निर्दोष बेटी की जघन्य हत्या के जुर्म में जिला कारागार गाजियाबाद में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही महिला कैदी अशरफी को बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपराध की नृशंसता को देखते हुए उसकी दया याचिका खारिज कर दी है।
अपराध की जघन्य प्रकृति बनी रिहाई में रोड़ा जिला कारागार प्रशासन से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर पर विचार-विमर्श किया गया। अपनी गर्भवती बेटी की बेरहमी से हत्या करने जैसे क्रूर और अक्षम्य अपराध की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल ने पाया कि कैदी को समय से पूर्व रिहा करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा।
संवैधानिक शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल नहीं दया याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया गया कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग केवल अपराध की प्रकृति, समाज पर प्रभाव और न्याय व्यवस्था के संतुलन को ध्यान में रखकर ही किया जाता है। घिनौने हत्या के मामलों में समय पूर्व रिहाई समाज में गलत संदेश देती है।
Ghaziabad Ashrafi Early Release Rejected के बाद जेल में ही कटेगी सजा राज्यपाल द्वारा याचिका खारिज होने के बाद अब अशरफी को अपनी उम्रकैद की बाकी बची सजा गाजियाबाद जेल में ही काटनी होगी। Ghaziabad Ashrafi Early Release Rejected के इस कड़े संदेश से यह साफ हो गया है कि जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को समय से पहले कोई संवैधानिक राहत नहीं दी जाएगी।







