Nepal Flood USGS Glacier Collapse मामले में अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल में तबाही किसी भूकंप से नहीं आई थी।
भूकंप नहीं, ग्लेशियर टूटने से मची तबाही
Nepal Flood USGS Glacier Collapse पर जारी नई रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दौर में जिसे 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा जा रहा था, वह असल में विशाल ग्लेशियर के गिरने और चट्टानों के मलबे से पैदा हुई सिस्मिक तरंगें थीं।
सिस्मिक तीव्रता को 5.2 में किया संशोधित
Nepal Flood USGS Glacier Collapse का अध्ययन करने के बाद USGS ने सिस्मिक डेटा की समीक्षा की और पाया कि 5,200 मीटर की ऊंचाई से ग्लेशियर टूटने और मलबे के तेज बहाव ने 5.2 तीव्रता का कंपन पैदा किया था।
पिघलती बर्फ और पानी बना हादसे की वजह
Nepal Flood USGS Glacier Collapse का कारण बताते हुए भू-आकृति विशेषज्ञों ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर कहा कि तापमान बढ़ने से ग्लेशियर के निचले बेस में पानी जमा हो गया था, जिससे घर्षण कम हुआ और पूरी बर्फ ढह गई।
नेपाल और तिब्बत के इलाकों में भारी नुकसान
Nepal Flood USGS Glacier Collapse के कारण रसुवा और धाडिंग जिलों में भीषण तबाही हुई, जिसमें 160 से अधिक लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।







