Indian Sugar Mills संकट में: Indian Sugar Mills को समय से पहले पेराई सत्र शुरू करने के फैसले के बाद अब मजदूरों की भयानक किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। देश में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति मजबूत करने के लिए सरकार ने ISMA और NFCSF के साथ मिलकर 15 दिन पहले काम शुरू करने की रणनीति बनाई थी।
पेराई योजना पर गहराया संकट: आमतौर पर गन्ना पेराई की शुरुआत 1 अक्टूबर से होती है, लेकिन 30 सितंबर तक चीनी का स्टॉक घटकर केवल 35 लाख टन रहने का अनुमान है। यही वजह है कि चीनी मिलों में समय से पहले काम शुरू करने का फैसला लिया गया, लेकिन अब महाराष्ट्र जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में मजदूरों की उपलब्धता ने इंडस्ट्री के होश उड़ा दिए हैं।
मजदूरों की मांग और नई चुनौती: महाराष्ट्र में गन्ना कटाई मजदूर आमतौर पर दिवाली के आसपास या नवंबर के पहले हफ्ते में ही अपने गांवों से काम के लिए निकलते हैं। मजदूर नेता गहिनी थोरे पाटिल का स्पष्ट कहना है कि मजदूर समय से पहले काम पर तभी लौटेंगे जब Indian Sugar Mills उनकी मजदूरी दरों में बढ़ोतरी करेंगी।
स्टॉक और कीमतों पर बढ़ता दबाव: गन्ने की कटाई के लिए मशीनों की सीमित निर्भरता के कारण Indian Sugar Mills पूरी तरह कटाई मजदूरों पर निर्भर हैं। यदि समय पर पेराई शुरू नहीं हो पाती है, तो आने वाले त्योहारी सीजन (अक्टूबर-नवंबर) के दौरान चीनी की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है।







